जल्दी शुरू की गई छोटी SIP आपके पैसे को तेजी से बढ़ने के लिए ज्यादा साल देती है। निवेश में देरी करने का मतलब है कि आप सही ढ़ग से कंपाउडिंग का फायदा नहीं उठा पाएंगे
लॉन्ग टर्म में छोटे निवेश भी बड़े रिटर्न दे सकते हैं। बस जरूरत हैं, जल्दी शुरुआत की। आकांक्षा और स्मिता के निवेश की कहानी कुछ ऐसा ही सबक सिखाती है। एक ने जल्दी और कम निवेश किया, जबकि दूसरी ने देर से लेकिन बड़ा निवेश शुरू किया, फिर भी जल्दी निवेश करने वाली दोस्त को कहीं बड़ा फायदा मिला। यह कंपाउडिंग (Compounding) की पावर दिखाता है और साथ ही बताता है कि बाजार में समय बिताना कितना जरूरी है।
आकांक्षा और स्मिता के निवेश का सफर
वैल्यू रिसर्च (Value Research) के विश्लेषण के अनुसार, पहली दोस्त आकांक्षा, ने 25 साल की उम्र से शुरू करके 35 सालों तक हर महीने ₹10,000 का निवेश किया। उसकी दोस्त, स्मिता ने 45 साल की उम्र तक इंतजार किया और फिर 15 सालों तक हर महीने ₹1 लाख का निवेश किया।
आकांक्षा (जल्दी शुरुआत):
शुरुआत की उम्र: 25 साल
मासिक SIP: ₹10,000
निवेश की अवधि: 35 साल
कुल योगदान: ₹42 लाख (₹10,000 x 12 महीने x 35 साल)
स्मिता (देर से शुरुआत):
शुरुआत की उम्र: 45 साल
मासिक SIP: ₹1 लाख (आकांक्षा से पांच गुना ज्यादा)
निवेश की अवधि: 15 साल
कुल योगदान: ₹1.8 करोड़ (₹1,00,000 x 12 महीने x 15 साल)
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₹1.8 करोड़ के निवेश पर भारी पड़ी ₹42 लाख की SIP
आकांक्षा के 60 साल की होने तक, उनकी ₹10,000 की साधारण एसआईपी 12% एनुअल रिटर्न मानकर 5.5 करोड़ रुपये की बड़ी रकम बन सकती है।
स्मिता, हर महीने पांच गुना ज्यादा निवेश करने के बावजूद, ₹4.75 करोड़ तक पहुंच सकती हैं, भले ही उनके निवेश में सालाना 12% की वृद्धि भी हो।
आंकड़ों से पता चलता है कि स्मिता ने आकांक्षा की तुलना में ₹1.38 करोड़ (₹1.8 करोड़ – ₹42 लाख) ज्यादा निवेश किया, और उसकी मंथली SIP भी पांच गुना ज्यादा थी। बावजूद इसके, आकांक्षा को अंत में स्मिता से कहीं बड़ा फंड (corpus) मिला।
इससे पता चलता है कि बाजार में बिताया गया समय (Time in the Market) निवेश की रकम (Size of Investment) से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
कंपाउडिंग का चला जादू
आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि एक जैसे रिटर्न के बाद भी नतीजे इतने अलग कैसे हो सकते हैं? यह इसलिए हुआ क्योंकि आकांक्षा ने स्मिता से 20 साल पहले निवेश शुरू कर दिया था। 35 वर्षों में उसके छोटे निवेश को कंपाउंडिग का जादू दिखाने का भरपूर मौका मिला। लेकिन स्मिता के पैसों को कंपाउंडिग के लिए 15 साल का ही समय मिला।
आकांक्षा के छोटे SIP निवेश ने स्मिता के बड़े लेकिन देरी से शुरू किए गए SIP निवेश को 4.3 करोड़ रुपये से पीछे छोड़ दिया। इसलिए नहीं कि आकांक्षा ने ज्यादा निवेश किया था। इसलिए नहीं कि वह ज्यादा भाग्यशाली थी। बल्कि इसलिए कि उसने इतनी जल्दी शुरुआत की कि उसके निवेश पर मिला ब्याज भी वापस निवेश होता रहा और समय के साथ तेजी से बढ़ता गया।
निवेशकों के लिए सबक
निवेशकों के लिए, खासकर 30 या 40 की उम्र के शुरुआती दौर में, इसका मतलब है कि देर करने और बाद में मासिक राशि बढ़ाने के बजाय आज ही एक मामूली SIP शुरू करना बेहतर है। कंपाउडिंग का गणित जल्दी निवेश करने पर फायदा देता है।
जल्दी शुरू की गई छोटी SIP आपके पैसे को तेजी से बढ़ने के लिए ज्यादा साल देती है। निवेश में देरी करने का मतलब है कि आप सही ढ़ग से कंपाउडिंग का फायदा नहीं उठा पाएंगे।








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