न्यू फंड ऑफर (NFO)
NFO, यानी न्यू फंड ऑफर (New Fund Offer) किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) द्वारा लॉन्च की गई नई म्युचुअल फंड स्कीम के लिए सब्सक्रिप्शन का पहला अवसर होता है। यह निवेशकों से पैसे जुटाने की एक प्रक्रिया है। इसमें एक निश्चित अवधि के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए आवेदन किया जाता है। इस अवधि के दौरान निवेशक एक निश्चित शुरुआती कीमत पर फंड की यूनिट्स खरीद सकते हैं। आमतौर पर किसी नए फंड का NAV (नेट एसेट वैल्यू) ₹10 प्रति यूनिट होती है।
मुख्य रूप से एनएफओ के प्रकार दो होते हैं:
| ओपन एंडेड फंड | क्लोज एंडेड फंड |
|---|---|
| ओपन-एंडेड NFO आपको शुरुआती ऑफर अवधि समाप्त होने के बाद भी म्युचुअल फंड यूनिट में निवेश करने की सुविधा देते हैं। | इनमें निवेशक केवल NFO अवधि के दौरान निवेश कर सकते हैं। |
| इन स्कीम्स की कोई समय सीमा नहीं होती, यह लंबे समय तक चलती रहती है। | इसमें निवेश एक निश्चित अवधि के लिए लॉक-इन रहता है। |
| आप अपनी सुविधानुसार इन स्कीम में प्रवेश कर सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं। | NFO अवधि समाप्त होने के बाद, फंड में आगे निवेश की अनुमति नहीं होती है। |
| ओपन एंडेड फंड में लिक्विडिटी ज्यादा होती है। | क्लोज एंडेड फंड में लिक्विडिटी कम होती है। |
| एनएफओ की अवधि के बाद, निवेशक किसी भी कार्यदिवस मौजूद NAV पर ओपन-एंडेड फंड यूनिट खरीद सकते हैं। | फंड के स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होने के बाद डीमैट में होल्ड की गई यूनिट को सेकेंडरी मार्केट में बेचा जा सकता है। |
| सीधे एएमसी के जरिये फंड में आगे निवेश किया जा सकता है। | इसमें आमतौर पर लंपसम निवेश का ही विकल्प मिलता है। |
| इसमें लंपसम और SIP दोनों के जरिये निवेश की सुविधा होती है। | SEBI के नियमों के अनुसार, सभी क्लोज-एंडेड फंड को एक्सचेंज में लिस्टेड होना चाहिए। |
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यहाँ SWP कैलकुलेटर की जानकारी दी जाएगी।
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