दुनिया में बढ़ते युद्ध, तेल संकट और ग्लोबल तनाव का असर अब भारत की कंपनियों की रणनीति पर साफ दिखने लगा है। कंपनियां अब सिर्फ मौजूदा मांग पूरी करने पर नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों की तैयारी में जुट गई हैं। इसी वजह से डिफेंस, पावर, एनर्जी, मेटल, डेटा सेंटर, EV और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टरों में बड़े स्तर पर कैपेक्स यानी पूंजी निवेश बढ़ रहा है।
ICICI Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 की चौथी तिमाही तक लिस्टेड कंपनियों का कुल कैपेक्स करीब 10.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। यानी कंपनियां नई फैक्ट्रियां लगाने, क्षमता बढ़ाने और बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से पैसा खर्च कर रही हैं।
आखिर कंपनियां इतना निवेश क्यों कर रही हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 के बाद से दुनिया लगातार बड़े संकटों से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, वेस्ट एशिया तनाव, टैरिफ वॉर और ऊर्जा संकट जैसी घटनाओं ने देशों को अपनी सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई को लेकर ज्यादा सतर्क बना दिया है। इसी वजह से अब डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, भरोसेमंद बिजली सप्लाई, कोयला, गैस और जरूरी मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत में भी कंपनियां इसी मांग को देखते हुए अपनी क्षमता बढ़ाने में जुट गई हैं।
डिफेंस और पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा हलचल
रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस और पावर सेक्टर में कंपनियां सबसे ज्यादा आक्रामक तरीके से निवेश बढ़ा रही हैं। HAL, Bharat Electronics और Solar Industries जैसी कंपनियां डिफेंस प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। वहीं Power Grid, Tata Power, Torrent Power और Adani Group की कंपनियां बिजली और ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बड़ा निवेश कर रही हैं। सरकार भी इस दिशा में तेजी दिखा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 37,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को भी तेजी से मंजूरी दी जा रही है।
स्टील और मेटल कंपनियां भी क्षमता बढ़ा रहीं
ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बढ़ने से स्टील और मेटल कंपनियों की मांग भी बढ़ रही है। इसी वजह से Tata Steel, SAIL, JSW Steel और Coal India जैसी कंपनियां भी बड़े निवेश प्लान लेकर चल रही हैं। इन कंपनियों का फोकस नई क्षमता जोड़ने, लागत कम करने और भविष्य की मांग पूरी करने पर है।
सीमेंट सेक्टर में निवेश जारी, लेकिन रफ्तार थोड़ी धीमी
रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट सेक्टर में निवेश जारी रहेगा, लेकिन पहले जैसी तेज रफ्तार शायद नहीं दिखेगी। यानी कंपनियां अभी भी नई क्षमता जोड़ रही हैं, लेकिन अब थोड़ा संभलकर निवेश कर रही हैं। हालांकि बिल्डिंग मटेरियल सेक्टर की दूसरी कंपनियां ज्यादा आक्रामक दिख रही हैं। सिरेमिक, लकड़ी और प्लास्टिक पाइप बनाने वाली कंपनियों ने FY27 के लिए मजबूत कैपेक्स प्लान बताए हैं।
डेटा सेंटर और क्विक कॉमर्स में निवेश की होड़
नई टेक्नोलॉजी वाले सेक्टरों में भी कंपनियां तेजी से पैसा लगा रही हैं। डेटा सेंटर सेक्टर में Reliance, Bharti, L&T, AdaniConnex, Microsoft और AWS जैसी कंपनियां बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग इसकी बड़ी वजह है। वहीं Quick Commerce सेक्टर में भी तेजी बनी हुई है। Blinkit जैसी कंपनियां FY27 में करीब 1,000 नए डार्क स्टोर खोलने की तैयारी में हैं। यानी 10-15 मिनट डिलीवरी वाले बिजनेस में अभी भी तेज विस्तार जारी है।
EV और ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव
ऑटो सेक्टर में भी कंपनियां अब EV यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर बड़ा दांव लगा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Maruti Suzuki समेत कई कंपनियां नई क्षमता और EV प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी FY27 में निवेश और बढ़ सकता है। NTPC Green Energy और Adani Green Energy जैसी कंपनियां बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर में तस्वीर अलग
रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थकेयर सेक्टर में अभी कोई एक जैसा ट्रेंड नहीं दिख रहा। कुछ कंपनियां नए अस्पताल, लैब और हेल्थकेयर सेवाओं पर निवेश बढ़ा रही हैं, जबकि कई कंपनियां अभी भी सतर्क बनी हुई हैं। बढ़ती लागत और खर्च की वजह से इस सेक्टर में निवेश बाकी सेक्टरों जितना आक्रामक नहीं दिख रहा।