हाई स्ट्रीट में मॉल से भी तेज बढ़ा किराया, दुकानदार प्रीमियम लोकेशन के लिए दे रहे ज्यादा रकम

एनारॉक रिपोर्ट के अनुसार हाई स्ट्रीट में किराये की दरों में ग्रेड ए मॉल की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है और दुकानदारों द्वारा प्रीमियम स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्रों (हाई स्ट्रीट) में…

हाई स्ट्रीट में मॉल से भी तेज बढ़ा किराया, दुकानदार प्रीमियम लोकेशन के लिए दे रहे ज्यादा रकम
aarti gosavi

Last Updated: January 8, 2026 | 6:00 AM IST

हाइलाइट्स

  • एनारॉक रिपोर्ट के अनुसार हाई स्ट्रीट में किराये की दरों में ग्रेड ए मॉल की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है और दुकानदारों द्वारा प्रीमियम स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्रों (हाई स्ट्रीट) में…

एनारॉक रिपोर्ट के अनुसार हाई स्ट्रीट में किराये की दरों में ग्रेड ए मॉल की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की गई है और दुकानदारों द्वारा प्रीमियम स्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है

प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्रों (हाई स्ट्रीट) में किराया मॉल के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। दुकानदारों का ध्यान मुख्य स्थानों पर केंद्रित हो रहा है और वे सबकी नजर में आने के वास्ते प्रीमियम किराया भी देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

एनारॉक की रिपोर्ट मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच हाई स्ट्रीट में किराये के मूल्य में सालाना 7 से 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह दमदार खपत और सीमित नई आपूर्ति के कारण संभव हो पाया है। यहां तक कि हाई स्ट्रीट में किराया ग्रेड ए मॉल से भी आगे निकल गया है, जिनकी वृद्धि दर 5 से 8 फीसदी की बीच रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ लक्जरी ब्रांडों ने मुख्य सड़कों पर लीजिंग में 40 फीसदी से ज्यादा का योगदान दिया है, क्योंकि वे सभी की नजरों में आने के लिए प्रीमियम भुगतान करने को तैयार हैं।

अश्विन शेठ समूह के मुख्य कारोबार अधिकारी भाविक भंडारी ने कहा, ‘अगले 12 से 24 महीनों में हाई स्ट्रीट के किराये में लगातार वृद्धि होने की गुंजाइश है, जबकि मॉल के किराये में मामूली वृद्धि ही हो पाएगी।’

सेकंडरी मॉल में स्थिरता

एक ओर जहां प्रीमियम और बेहतरीन इलाके वाले मॉल में अच्छी ऑक्यूपेंसी और किराये में बढ़ोतरी जारी है, वहीं सेकंडरी और असंगठित परिसंपत्तियों में स्थिरता देखी जा रही है क्योंकि दुकानदार भी मुख्य स्थानों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

अधिकतर बड़े शहरों में साल 2024 से ही किराया स्थिर हो गया है। एनारॉक के मुताबिक, मुंबई के बड़े मॉल में किराया हर महीने 800 से 1,000 रुपये प्रति वर्गफुट। दिल्ली के खान मार्केट में दुकानदार को हर महीने 900 से 1,500 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से किराया देना होता है। बेंगलूरु में यह 500 से 600, हैदराबाद में 250 से 400, चेन्नई में 400 से 500 और पुणे में 450 से 575 रुपये प्रति वर्ग फुट है। किराये में पिछली तिमाही से कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैश्विक महामारी के बाद आए तेज सुधार के बाद अब वृद्धि घटकर एक अंक में रह गई है। वित्त वर्ष 2023 में मॉल के किराये में करीब 30 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई थी।

एनारॉक के रिटेल लीजिंग और इंडस्ट्रियल ऐंड लॉजिस्टिक्स के मुख्य कार्य अधिकारी अनुज केजरीवाल कहते हैं, ‘आजकल मॉल का किराया हर साल सिर्फ 6 से 10 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। वह भी मॉल की गुणवत्ता और वह कहां स्थित है इस पर निर्भर करता है।’

मगर विशेषज्ञों ने कहा कि यह नरमी मुख्य रूप से ग्रेड बी और सी मॉल तक ही सीमित है जहां अब भी बड़ी संख्या में किराये के लिए दुकान उपलब्ध हैं। ग्रेड ए मॉल में 93 से 97 फीसदी ऑक्यूपेंसी स्तर है, जबकि सेकंडरी मॉल में 30 से 35 फीसदी स्थान रिक्त हैं। साल 2021 से 2025 के बीच ग्रेड ए मॉल के किराये में 5 से 8 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि ग्रेड बी और सी मॉल का किराया या तो स्थिर रहा या फिर उनमें गिरावट आई।

श्रेय प्रोजेक्ट्स के मुख्य कार्य परिचालन अधिकारी साहिल वर्मा का मानना है कि कुल मिलाकर वृहद परिवेश (गैर जरूरी खर्च, शहरी, ग्रामीण वेतन वृद्धि) अब भी स्थिर नहीं है, जबकि मांग में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘किरायेदार और मकान मालिक दोनों रूढ़िवादी व्यवहार कर रहे हैं। इसलिए, वे अब तक आक्रामक तरीके से किराया बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है, जब तक कि बिक्री स्थिर न हो जाए।’ मॉल डेवलपर और ऑपरेटरों का मानना है कि मंदी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और यह मुख्य तौर पर सेकंडरी मॉल पर लागू होता है।