India-US Trade: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिका ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे भारत की चिंता बढ़ सकती है। अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही है।
अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जो जबरन मजदूरी से बनाए गए हो। इसी वजह से इन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने कहा है कि भारत उन 54 देशों में शामिल है जिन्होंने ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई है। इस सूची में चीन, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई बड़े देश भी शामिल हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है। अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच इन दिनों नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत और मुश्किल हो सकती है। अब सिर्फ आयात शुल्क और बाजार पहुंच ही नहीं, बल्कि श्रम कानूनों और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
India-US Trade: कितना अतिरिक्त शुल्क लग सकता है?
अमेरिका ने कहा है कि जिन देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान पर कोई प्रभावी रोक नहीं है, वहां से आने वाले उत्पादों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं जिन देशों ने इस दिशा में कुछ नियम बनाए हैं या अमेरिका के साथ कोई समझौता किया है, उनके लिए 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है।
अमेरिका की दलील क्या है?
अमेरिका का कहना है कि अगर कुछ देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान आसानी से बाजार में पहुंच जाते हैं, तो वहां की कंपनियों की लागत कम हो जाती है। इससे उन कंपनियों को नुकसान होता है जो श्रम नियमों का पालन करती हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर ने कहा कि दुनिया के बड़े व्यापारिक साझेदारों का इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को नुकसान होता है।
क्या है सेक्शन 301?
अमेरिका ने यह प्रस्ताव अपने व्यापार कानून की धारा 301 के तहत रखा है। यह कानून अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है, जिनकी नीतियां उसे अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक या अनुचित लगती हैं। इस कानून के तहत अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध भी लगा सकता है।
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो भारत समेत कई देशों के निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब भारत और अमेरिका दोनों व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।